उज्जवला योजना से जनता का मोहभंग, ढाई लाख उपभोक्ता ने बढ़ते दामों के बीच छोड़ा सिलेंडर लेना

पांच साल पहले शुरू हुई केंद्र सरकार ने उज्जवला योजना के तहत फ्री गैस चूल्हा, रेग्यूलेटर और सिलेंडर दिये थे। जयपुर शहर में ढाई लाख उज्जवला योजना के सिलेंडर लोगों को वितरित किए गए थे।

उज्जवला योजना सिलेंडर

देश में जनता का उज्जवला योजना से मोहभंग हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा शुरु की गई यह योजना राजस्थान में दम तोड़ती नजर आ रही है। लगातार बढ़ते सिलेंडरों के दाम और सब्सिड़ी बंद होने से प्रदेश में इस योजना से जुड़े उपभोक्ताओं ने सिलेंडर लेना ही बंद कर दिया है।

बता दें कि पांच साल पहले शुरू हुई केंद्र सरकार ने उज्जवला योजना के तहत फ्री गैस चूल्हा, रेग्यूलेटर और सिलेंडर दिये थे। जयपुर शहर में ढाई लाख उज्जवला योजना के सिलेंडर लोगों को वितरित किए गए थे।

लेकिन अब पता चला है कि कोरोना की आर्थिक तंगी , सिलेंडर के बढ़ते दाम औस सब्सिडी ना मिलने जैसे कई कारणों से परेशान परिवार ने उज्जवला सिलेंडर मंगवाना ही बंद कर दिया है। ये परिवार अब फिर से चूल्हे व कोयला की सिगड़ी पर खाना बनाने लगे हैं।

जयपुर में 1.80 उपभोक्ताओं ने छोड़े सिलेंडर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में ढाई लाख उपभोक्ताओं में से अब तक 1.80 लाख उज्जवला उपभोक्ताओं ने सिलेंडर लेने ही बंद कर दिए हैं। अब सिर्फ उज्जवला के 70 हजार परिवार ही सिलेंडर ले रहे हैं।

इसके अलावा राजस्थान के ही जैसलमेर के पोकरण में 80 प्रतिशत परिवारों ने सिलेंडर लेना बंद कर दिया है। जानकारी के अनुसार उज्जवला योजना के तहत पोकरण में 9700 कनेक्शन दिए हुए हैं जिनमें से 20% लोग ही गैस रिफिल कराते हैं।

598 का सिलेंडर अब 900 के करीब पहुंचा

जानकारों की मानें, तो उज्जवला सिलेंडर को छोड़ने के पीछे ऐसे तो कई वजह है, लेकिन मुख्य रूप सिलेंडर के बढ़ते दाम ही हैं। बता दें कि कोरोना काल में गत नवंबर में सिलेंडर 598 रुपए का था। लेकिन फिर अचानक सब्सिडी बंद कर दी गई।

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अब सिलेंडर के दाम 888.50 रुपए तक पहुंच चुके हैं और सब्सिडी भी बंद है। ऐसे में मंहगाई की मार और राशन तक जुटा पाने वाले बीपीएल परिवारों के लिए अब महंगा सिलेंडर बूते से बाहर हो गया है।