अंततः “रावण” चला गया।

"दशानन रावण" के किरदार को जीवंत करने वाले महान अभिनेता श्री अरविन्द त्रिवेदी जी आज अपने पार्थिव शरीर को त्याग कर महादेव की शरण में चले गएl

रामानंद सागर कृत रामायण में “दशानन रावण” के किरदार को जीवंत करने वाले महान अभिनेता श्री अरविन्द त्रिवेदी जी आज अपने पार्थिव शरीर को त्याग कर महादेव की शरण में चले गए। महादेव का नाम इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि रावण से महान, महादेव का न कोई भक्त था, न है और न होगा। वास्तविक जीवन में भी त्रिवेदी जी मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम और महादेव के भक्त थे।

मुझे बड़ा दुख होता है जब आज कल के ये छपरी लौंडे बैकग्राउंड में “दशानन रावण हूँ मैं” गाने की धुन बजाकर उल्टी सीधी वीडियो बनाकर उपलब्धि पाना चाहते हैं। रावण अपने आप में एक साधना है, एक चिंतन का विषय है।

मेरा एक अभिनेता के रूप में मानना है कि यदि आप पौराणिक कथाओं को अपने अभिनय का हिस्सा बना रहे हैं तो आपको उस चरित्र विशेष का गहन अध्ययन और चिंतन करना चाहिये तभी आप रंगमंच पर उस किरदार के साथ “न्याय” कर पाएँगे।

ख़ैर! रावण का जब भी जिक्र होगा तो अरविंद त्रिवेदी साहब का वो अट्टहास याद आएगा।

इस कर्मभूमि में आपके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। एक अभिनेता और एक कवि के रूप में मैं आपकी दिवंगत आत्मा को प्रणाम करता हूँ।

By : iamkumargourav

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