योगी सरकार ने लखीमपुर हिंसा की जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंपी, 2 महीने में आएगी रिपोर्ट

लखीमपुर हिंसा मामले में योगी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की 1 सदस्यीय जांच आयोग को हिंसा की जांच के लिए 2 महीने का वक्त दिया गया है। आयोग मामले की जांच कर 2 महीने के भीतर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। आयोग का मुख्यालय लखीमपुर खीरी में होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनी आयोग को सौंप दी है। प्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्त जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को पूरे मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है। श्रीवास्तव को 2 महीने के भीतर इस पूरे मामले की जांच की रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि जांच आयोग के गठन के लिए सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। मामले में आयोग को जांच के लिए 2 महीने का समय दिया गया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से इस संबंध में 6 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी किया गया है।

6 अक्टूबर को जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट 1952 के सेक्शन 3 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के अंतर्गत एक सदस्य जांच आयोग गठित किया गया है। इसका मुख्यालय लखीमपुर खीरी में होगा। आयोग को जांच के लिए नोटिफिकेशन जारी होने के बाद से 2 महीने तक का वक्त रिपोर्ट सौंपने के लिए दिया जा रहा है। आयोग के कार्यकाल में किसी भी तरह का बदलाव को लेकर सरकार फैसला लेगी।

बता दें कि रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई। इसमें 4 किसान थे। इसके अलावा दो भाजपा कार्यकर्ता, एक पत्रकार और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के ड्राइवर की मृत्यु हो गई थी। यह घटना तब हुई थी जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत के लिए भाजपा नेता और कार्यकर्ता जा रहे थे। उपमुख्यमंत्री मौर्य जिले में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे।

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