क्या आप जानते है की चंदन की लकड़ी से भी ज्यादा महंगी लकड़ी कौन सी है? आइये हम बताते है!

दुनिया में और भी ऐसी लकड़ी है, जो चंदन की लकड़ी की कीमत से कई गुना ज्यादा महंगी है। इसे खरीदने से पहले बड़े से बड़े अमीर भी दो-चार बार जरूर सोचेंगे।

African Blackwood

कुछ लकड़ियां अविश्वसनीय रूप से काफी महंगी होती हैं तो कुछ बेहद ही दुर्लभ। वैसे आमतौर पर चंदन की लकड़कियों को ही महंगा माना जाता है, जिसकी कीमत पांच से छह हजार रुपये प्रति किलो तक होती है।

लेकिन अब आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में और भी ऐसी लकड़ी है, जो चंदन की लकड़ी की कीमत से कई गुना ज्यादा महंगी है। इसे खरीदने से पहले बड़े से बड़े अमीर भी दो-चार बार जरूर सोचेंगे।

1) अफ्रीकी ब्लैकवुड (African Blackwood)

अफ्रीकी ब्लैकवुड, यह धरती पर मौजूद सबसे मूल्यवान सामग्रियों में से एक है। इस लकड़ी की महज एक किलोग्राम की कीमत आठ हजार पाउंड यानी सात लाख रुपये से भी ज्यादा है। इतने में तो एक अच्छी खासी लग्जरी कार खरीद सकते हैं।

वैसे तो इस पेड़ को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 60 साल का समय लगता है, लेकिन केन्या और तंजानिया जैसे देशों में इसके लकड़ी की अवैध तस्करी की वजह से समय से पहले इन पेड़ों को काट लिया जाता है। इससे ब्लैकवुड की संख्या में भारी कमी आई है, जिसकी वजह से ये दुर्लभ हो गए हैं।

अफ्रीकी ब्लैकवुड की लकड़ी का ज्यादातर इस्तेमाल शहनाई, बांसुरी और गिटार जैसे संगीत वाद्ययंत्र बनाने के काम में होता है। इसके अलावा इस लकड़ी से मजबूत और टिकाऊ फर्नीचर भी बनाए जाते हैं, लेकिन वो काफी महंगे होते हैं। इतने महंगे कि उन्हें खरीदना आम लोगों के बस की बात नहीं है।

2) अगरवुड या ईगल वुड (Agarwood or Eagle Wood)

इसका वैज्ञानिक नाम है, एक्वेलारिया मेलेसिनेसिस (Aquilaria malaccensis) और यह मूल रूप से एशिया का वृक्ष है। भारत के साथ साथ यह चीन और पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है। भारत में यह त्रिपुरा, नागालैंड, असम, मणिपुर और केरल में मिलता है। ईगलवुड़ त्रिपुरा का राजकीय वृक्ष है।

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अगरवुड एक सुगंधित लकड़ी होती है जिसका इस्तेमाल अगरबत्ती, इत्र आदि जैसी सुगंधित चीजें व औषधीय शराब बनाने में किया जाता है। मान्यता के अनुसार अगरवुड की सुगंध के प्रति ईश्वरआकर्षित होते हैं अतः इसे दैवीय लकड़ी (wood of gods) की संज्ञा दी गई है।

अगरवुड की लकड़ी से ऑड तेल निकाला जाता है, जिससे इत्र बनाते हैं। ऑड ऑइल की कीमत 50,000 डॉलर प्रति किलो यानी करीब 36 लाख रुपये प्रति किलो होती है, जिससे इसे लिक्विड गोल्ड भी कहा जाता है।

अगरवुड की सुगंध लकड़ी में छेदक कीट के बनाये छेद में ज्युजेरा कंफर्टा (Zeuzera conferta) नामक फंगस के इंफेक्शन के कारण होती है। यह एक प्राकृतिक क्रिया है और कृतिम उपायों से इसमें सफलता नहीं मिली है।