क्या भारत में भी आएगा बिजली संकट? बिजली संयंत्रों के पास कोयले का स्टॉक 4 दिन के लिए ही बचा

रिपोर्ट में कहा गया है कि 3 अक्टूबर को 135 संयंत्रों में कुल 78 लाख 9 हजार 200 टन कोयले का भंडार मौजूद था। रिपोर्ट में बताया गया कि 135 बिजली संयंत्रों में से किसी के भी पास 8 या उससे अधिक दिनों तक का कोयले का भंडार नहीं था।

भारत में बिजली संकट

बीते दिनों चीन में कोयले की कमी से बिजली संकट पैदा हो गया है। चीन में कई फैक्ट्रियां बंद हो चुकी है। चीन सरकार ने कोयले के संकट को देखते हुए पानी को गर्म करने पर भी रोक लगा दिया है। इस बीच भारत में भी बिजली संकट का अंदेशा जताया जा रहा है।

भारत में त्योहारी सीजन से पहले कोयला संकट बढ़ता जा रहा है। अगर देश में कोयले का संकट और गहराया तो भारत में भी बिजली गुल हो सकती है। दरअसल देश में कोयले की खानों से दूर स्थित बिजलीघर में 4 दिन से भी कम समय के लिए कोयला बचा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन बिजली उत्पादन केंद्रों में कोयले का स्टॉक खत्म हो रहा है और आने वाले 3 से 4 दिनों में पूरा स्टॉक ही खत्म हो जाएगा। केंद्रीय बिजली प्राधिकरण कि बिजली संयंत्रों के लिए कोयला भंडार पर ताजा रिपोर्ट से यह बात पता चला है।

रिपोर्ट के मुताबिक 25 ऐसे बिजली संयंत्र हैं जिसमें 3 अक्टूबर को 7 दिन से भी कम समय का कोयला भंडार था। देश में कम से कम 64 बिजली घर ऐसे हैं जहां पर कोयले का भंडार मात्र 4 दिनों का ही बचा है। बता दें कि केंद्रीय बिजली प्राधिकरण देश में कुल 135 बिजली संयंत्रों का निगरानी करता है। इन बिजली संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 165 गीगावॉट है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 3 अक्टूबर को 135 संयंत्रों में कुल 78 लाख 9 हजार 200 टन कोयले का भंडार मौजूद था। रिपोर्ट में बताया गया कि 135 बिजली संयंत्रों में से किसी के भी पास 8 या उससे अधिक दिनों तक का कोयले का भंडार नहीं था।

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हालांकि इन सबके बीच सरकार का कहना है कि दो-तीन दिनों में कोयले की आपूर्ति कर दी जाएगी। बता दें कि भारत में बिजली उत्पादन के लिए सबसे अधिक कोयले का ही इस्तेमाल किया जाता है। कोयले की किल्लत को देखते हुए भारत सरकार ने अब धीरे-धीरे अन्य बिजली उत्पादन के साधनों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।

कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए देश में अब सोलर एनर्जी पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। इसके अलावा देश के कई नदियों पर हाइड्रो बिजली पावर हाउस का निर्माण भी किया गया है। देश में कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन इकाइयां कम क्षमता पर चल रहे हैं। बताया जाता है कि उत्पादन कम होने से प्रबंधन को बिजली की कमी पूरी करने के लिए अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है।